बच्चा बार बार पॉटी करता है तो क्या करना चाहिए?HealthPlanet

Posted on Sat 22nd Oct 2022 : 14:54

जन्म के बाद आमतौर पर शिशु जल्दी-जल्दी मल त्याग करते हैं। साथ ही उनके मल के रंग में भी दिन-ब-दिन बदलाव देखे जाते हैं। उनके खान-पान और स्वास्थ्य की स्थिति के कारण ऐसा होना संभव है। साथ ही मल की रंगत, गंध और आकार बच्चे की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की ओर भी इशारा करते हैं। इसे अक्सर महिलाएं समझ नहीं पातीं। खासकर वो महिलाएं, जो पहली बार मां बनी हैं। ऐसे में पहली बार मां बनने के बाद अधिकतर महिलाएं शिशु के सामान्य मल त्याग में बदलाव देखकर परेशान हो जाती हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हम मॉमजंक्शन के इस लेख में बच्चों के मल से जुड़ी कुछ जरूरी बातें बता रहे हैं, जिससे आपको बच्चों के सामान्य और असामान्य मल त्याग को समझने में मदद मिलेगी।

सामान्य रूप से बच्चा दिन में कितनी बार पॉटी (मल त्याग) करता है, लेख में पहले इसी बारे में बात करते हैं।
बेबी का दिन में कितनी बार पॉटी करना सामान्य है?

सामान्य तौर पर जन्म के बाद करीब दो हफ्ते तक बच्चा कम मात्रा में दिन में करीब आठ से दस बार मल त्याग कर सकता है। वहीं, समय के साथ जैसे-जैसे बच्चे का विकास होता है, हर दिन के अनुसार उसके मल त्याग की मात्रा और अंतराल में बदलाव आने लगता है। कहने का मतलब यह है कि उसकी दिन में पॉटी करने की सीमा सीमित होने लगती है। इस बात को हम नीचे दिए गए चार्ट की मदद से थोड़ा बेहतर तरीके से समझ पाएंगे (1)।
बच्चे की उम्र दिन में कितनी बार मलत्याग (पॉटी)
पहले दो हफ्ते में करीब 8 से 10 बार
28वें दिन तक करीब 2 से 3 बार
1 से 12 महीने के बीच करीब 1 से 2 बार
13 से 24 महीने तक करीब 1 बार

लेख के अगले भाग में हम शिशुओं के मल के रंग से मिलने वाले संकेत के बारे में जानने की कोशिश करेंगे।
शिशुओं में मल का रंग क्या संकेत देता है? | Baby Ki Potty Ka Colour

काला : जब नवजात शिशु जन्म के बाद पहली बार मल त्याग करता है, तो वह काले रंग का होता है। इस मल को मेकोनियमकहा जाता है। ऐसा होना बिल्कुल सामान्य है। वहीं, समय के साथ बच्चे के मल का रंग धीरे-धीरे बदलने लगता है (2)। इसलिए, अगर जन्म के चौथे दिन के बाद बच्चा काला मल त्याग करता है, तो यह सामान्य नहीं है (3)। ऐसे में बच्चे को तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

पीला रंग : जन्म के चौथे दिन से बच्चे के मल का रंग पीले रंग का दिखने लगता है। ऐसा होना बिल्कुल सामान्य है और यह इस बात को प्रदर्शित करता है कि बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है (2)।

चमकीला पीला : जन्म के बाद पांचवें दिन से बच्चे को चमकीला पीला रंग का मल होने लगता है, जो हल्का पतला होता है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन पानी जैसा चटकीला पीला रंग का मल कुछ मामलों में डायरिया का संकेत हो सकता है (2)। ऐसे में जरा-सा भी संशय होने पर डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

संतरे के रंग जैसा : अगर बच्चा संतरे के रंग का पीलापन लिए मल का त्याग करता है, तो यह पीलिया का संकेत हो सकता है। इसकी आशंका स्तनपान करने वाले बच्चों के मुकाबले फॉर्मूला दूध पीने वाले बच्चों में अधिक हो सकती है (4)। ऐसा होने पर आपको बिना देर किए बच्चे को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।

लाल : अगर आपके बच्चे को लाल रंग का मल हो रहा है, तो यह बिलकुल भी सामान्य नहीं है (3)। मुमकिन है कि मल में खून आने की वजह से उसका रंग लाल दिखाई दे रहा हो। यह डिसेंट्री इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है (5)। ऐसा होने पर डॉक्टर के पास जाने में आपको बिल्कुल भी देर नहीं करनी चाहिए।

हरा | : बच्चे के जन्म के बाद उसका मल पीले के साथ-साथ कभी-कभी हरे रंग का भी दिखाई दे सकता है। ऐसा होना सामान्य है (2)। दरअसल, बच्चे छह महीने तक दूध के अलावा और कुछ नहीं खाते-पीते हैं, ऐसे में कभी-कभी पानी की कमी होने की स्थिति में मल का रंग हरा हो सकता है। वहीं, फॉर्मूला मिल्क पीने वाले करीब 50 प्रतिशत बच्चे हरे रंग का मल त्याग करते हैं (6)।

गहरा हरा : गहरे हरे रंग के मल त्याग की बात करें, तो ऐसा मल सामान्य तौर पर फॉर्मूला मिल्क पर निर्भर करने वाले शिशुओं में देखा जाता है। यह भी एक सामान्य प्रक्रिया है (7)।

सफेद : पाचन संबंधी समस्या होने पर शिशु सफेद रंग का मल त्याग कर सकते हैं। यह एक असामान्य स्थिती है। ऐसा होने पर आपको बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए (3)।

ग्रे कलर : शिशुओं के मल का रंग ग्रे होना भी असामान्य है (8)। यह इस बात का संकेत देता है कि बच्चे को लिवर, गाल ब्लैडर या पेनक्रियाज से संबंधित कोई समस्या है (9)। इसलिए, ऐसा होने पर आपको डॉक्टर से मिलने में जरा भी देर नहीं करनी चाहिए। वहीं, कभी-कभी आयरल सप्लीमेंट की वजह से भी शिशिओं का मल ग्रे रंग का हो सकता है।

शिशुओं के मल में रंगों की भिन्नता को अच्छे से जानने के बाद अब हम शिशुओं में मल की बनावट और स्थिरता से जुड़ी जानकारी देंगे।
शिशुओं में मल की बनावट और स्थिरता
नवजात शिशु का मल कैसा होगा? |

लेख के शुरुआत में बताया गया है कि नवजात शिशु का पहला मल काले रंग का होता है, जो प्रतिदिन के अनुसार धीरे-धीरे हल्का होने लगता है। वहीं, जन्म के चौथे दिन के बाद से बच्चे का मल पीला या हरे रंग का दिखने लग सकता है (2)।
अगर आप स्तनपान कराती हैं, तो आपके बच्चे का मल कैसा होगा?

अगर आप बच्चे को स्तनपान कराती हैं, तो बच्चे का मल पीला, गहरा भूरा और गहरे हरे रंग का हो सकता है। यह सामान्य अवस्था है, जो समय के अनुसार पाचन शक्ति के विकसित होने के तौर पर मल की रंगत में बदलाव के रूप में दिखाई देती है (7)।
अगर आप फॉर्मूला फीडिंग कराती हैं, तो आपके बच्चे का मल कैसा होगा?

अगर आप बच्चे को फॉर्मूला फीडिंग कराती हैं, तो स्तनपान करने वाले बच्चों के मुकाबले उसका मल अधिक पीला, भूरा और हरे रंग का नजर आ सकता है। साथ ही स्तनपान करने वाले बच्चों के मुकाबले थोड़ा ठोस अवस्था में नजर आ सकता है (7)।
अगर शिशु स्तनपान छोड़कर फॉर्मूला दूध पिए, तो क्या उसके मल में बदलाव होगा?

जैसा कि लेख में ऊपर बताया गया है कि स्तनपान करने वाले शिशुओं की अपेक्षा फॉर्मूला फीडिंग करने वाले बच्चों के मल का रंग (पीला, हरा, भूरा) अधिक गहरा और थोड़ा ठोस हो सकता है (7)। इस कारण यह कहा जा सकता है कि स्तनपान छोड़कर फॉर्मूला फीडिंग करने वाले शिशुओं में ये अंतर स्वाभाविक तौर पर देखे जा सकते हैं। वहीं, कुछ बच्चों को फाॅर्मूला दूध की वजह से कब्ज की शिकायत भी हो सकती है।
ठोस पदार्थों के आहार के बाद बच्चों का मल

बता दें कि फॉर्मूला फीडिंग की तरह ही ठोस आहार लेने के बाद बच्चों का मल भी स्तनपान करने वाले बच्चों के मुकाबले गहरा पीला, भूरा व हरे रंग का और ठोस हो सकता है (7) (10)। वहीं, ठोस आहार लेने वाले बच्चे शुरुआत में अधिक फाइबर को पचा नहीं पाते, इसलिए उनके मल में खाद्य पदार्थों के कुछ अंश देखने को मिल सकते हैं।

लेख के अगले भाग में अब हम बच्चों के असामान्य मल के बारे में जानकारी हासिल करेंगे।
किस तरह का मल सामान्य नहीं है?

बच्चे का मल सामान्य है या असामान्य, इस बारे में हम ऊपर रंग के आधार पर विस्तार में बता चुके हैं। आइए, यहां हम इस बारे में थोड़ा और विस्तार से जान लेते हैं।

कब्ज |कब्ज की शिकायत होने पर बच्चों को मल त्याग में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आप बच्चे को पीठ की सहायता से जमीन पर लिटाएं और उसके दोनों पैरों को पकड़ कर घड़ी की सुइयों की दिशा में धीरे-धीरे घुमाएं। उसके बाद बच्चे के दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए उसकी छाती से चिपकाएं। इससे बच्चे को मल त्याग में मदद मिलेगी (10)। समस्या अधिक होने की स्थिति में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

दस्त (डायरिया) | लेख में हम पहले ही बता चुके हैं कि चमकीला पीला मल डायरिया का संकेत हो सकता है (2)। ऐसे में आपको बिना देर किए डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

खून : लाल रंग का मल या मल त्याग में खून की समस्या भी गंभीर डायरिया का परिणाम हो सकती है, जो एक असामान्य स्थिति हैं (5)। ऐसे में बच्चे को डॉक्टर को दिखाएं और समय रहते उचित इलाज करवाएं।

झाग | बच्चों के मल में झाग दिखाई देना लैक्टोज की अधिक मात्रा के कारण हो सकता है, जो दूध की अधिक खुराक के कारण संभव है। यह एक खास तत्व है, जो मुख्य तौर पर दूध या दूध से बने पदार्थों में पाया जाता है (11)। ऐसे में बच्चों के दूध की मात्रा में बदलाव कर इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। वहीं, अगर बच्चा फॉर्मूला दूध लेता है, तो उसमें पानी की मात्रा को बढ़ाकर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

लेख के अंत में हम उन लक्षणों के बारे में भी जान लेते हैं, जिनके नजर आते ही बच्चे को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।


सफेद, मटमैला, काला और लाल (खूनी) मल का दिखना असामान्य है, जो बच्चे से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की ओर इशारा करता हैं। इनमें से कई के बारे में हम आपको लेख में पहले ही बता चुके हैं। वहीं, पतले रिबन और पेंसिल के आकर का मल आना भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या को प्रदर्शित करता है। इसके अलावा, अत्यधिक कड़ा या पानी जैसा मल आना भी असामान्य स्थिति है (3)। इनमें से किसी भी तरह का मल नजर आने पर बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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